महामस्तकाभिषेक

मूलनायक श्री शांतिनाथ-कुंथुनाथ-अरनाथ भगवान की लगभग 900 वर्ष प्राचीन 18 फुट उतंग अतिशयकारी प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक करने का पुण्य अवसर वर्ष में 2 बार भक्तों को मिलता है। पहली बार महामस्तकाभिषेक करने का अवसर पदयात्रा आयोजन के उपरांत 1 जनवरी को आयोजित होने वाले जैन रथोत्सव एवं नववर्ष अभिनन्दन के समय मिलता है जबकि दूसरा अवसर श्री शांतिनाथ भगवान के जन्म तप मोक्ष कल्याणक के दिन ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को मिलता है ।

पदयात्रा | महामस्तकाभिषेक | जैन रथोत्सव | नववर्ष अभिनंदन

(आगामी – गुरुवार, 31 दिसंबर 2015 एवं शुक्रवार, 1 जनवरी 2016)
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पदयात्रा : श्री सुधासागर जी महाराज के परम आशीर्वाद से अब प्रतिवर्ष 31 दिसंबर को गुना नगर से भव्य पदयात्रा निकाली जाएगी। जो की बड़े जैन मंदिर से मुख्य बाज़ार, नसिया जी होती हुई पुण्योदय तीर्थ बजरंगढ़ पहुचेगी। 2013 की पदयात्रा में जहाँ मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज, छुल्लक गंभीरसागर जी महाराज एवं छुल्लक धैर्यसागर जी महाराज का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ वहीँ वर्ष 2014 में मुनि श्री प्रशांत सागर जी महाराज एवं मुनि श्री निर्वेग सागर जी महाराज का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ । यह पदयात्रा उसी दिन पहुंचकर रात्रि विश्राम बजरंगढ़ में पुण्योदय तीर्थ में ही करेगी।

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नववर्ष अभिनन्दन : पदयात्रा पुण्योदय तीर्थ पहुचने के बाद रातभर भगवत भक्ति होगी । अध्यात्मिक भजनों और भक्ति के बीच भक्त नववर्ष का अभिनन्दन करते है । गत वर्ष 31 दिसंबर 2014 को जैन भजन सम्राट एवं श्रावक संस्कार शिविर में अपने अध्यात्मिक भजनों से धर्म प्रभावना करने वाले बाल बम्हचारी श्री विनोद भैया (जबलपुर) की सुमधुर वाणी में अध्यात्मिक भजनों को सुनने का अवसर मिला ।

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महामस्तकाभिषेक : अगले दिन एक जनवरी को मूलनायक भगवान श्री शांतिनाथ कुंथुनाथ अरनाथ जी का महामस्तकाभिषेक होता है । इसके लिए मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रत्येक भक्त को विशेष आशीर्वाद दिया है। सप्त दिवसीय अभिषेक मंडल के प्रत्येक सदस्य को महामस्तकाभिषेक अनिवार्य है । इन सदस्यों ने मुनिश्री को वचन दिया था कि वह चाहे किसी भी परिस्थिति और कहीं भी हों लेकिन 31 दिसंबर की पदयात्रा में जरूर शामिल होंगे और 1 जनवरी को महामस्तकाभिषेक करेंगे। इस मौके पर हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहते है । महामस्तकाभिषेक के बाद यहां स्वल्पाहार का आयोजन भी रखा जाता है ।

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जैन रथोत्सव (विमान जी ) : वर्ष 2014 तक जैन रथोत्सव (विमान जी ) कार्तिक वदी पंचमी को शोभायात्रा निकाली जाती थी । लेकिन 2015 से मुनिश्री के आशीर्वाद से यह निर्णय लिया गया की अब 1 जनवरी को होने वाले महामस्तकाभिषेक के उपरांत दोपहर में वार्षिक जैन रथोत्सव (विमान जी) निकले जावेंगे, जो तीर्थक्षेत्र मंदिर से प्रारंभ होकर बाजार मंदिर होते हुए बाजार चौराहे तक जावेंगे एवं वहां से वापस आवेंगे । इसके बाद फूलमाल, और ज्ञानमाल की बोलियां लगाई जाती हैं इसके बाद कलशाभिषेक होता है । विमानोत्सव के बाद यहां वात्सल्य भोज का आयोजन भी रखा जाता है ।

शांतिनाथ भगवान के जन्म-तप-मोक्ष कल्याणक

(आगामी – रविवार, 17 मई 2015 )
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भगवान 1008 श्री शांतिनाथ जी के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक के मौके पर ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन भी महामस्तकाभिषेक का आयोजन प्रतिवर्ष रखा जाता है। 1 जनवरी को पदयात्रा के अलावा यह द्वितीय अवसर होता हैं जब मूलनायक भगवान का महामस्तकाभिषेक भक्तों को मिलता है।

अन्य कार्यक्रम

हाथी फेरी

(आगामी – बुधवार, 23 सितम्बर 2015)
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यहां एक और वार्षिक आयोजन “हाथीफेरी” के रूप में किया जाता है। प्रतिवर्ष पर्यूषण पर्व के दौरान धूपदशमी के दिन हाथीफेरी निकाली जाती है। इसका अपना अलग इतिहास है। यह भी संभवता देश में पहला ही आयोजन है।

जिनवाणी पालकी

(आगामी – रविवार, 27 सितम्बर 2015)
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यह संभवता देश का पहला मामला ही होगा जहां प्रतिवर्ष पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन (भादो सुदी चतुर्दशी) पर भव्य जिनवाणी पालकी निकाली जाती है। जिसमें शामिल होने के लिए भक्तों की आतुरता देखने को मिलती है। तीनों मंदिरों में जिनवाणी मां की सवारी जाती है जहां श्रीजी के कलशाभिषेक के बाद शोभायात्रा वापस तीर्थक्षेत्र आती है। जहां फूल माल, ज्ञान माल की बोलियों के बाद श्रीजी के कलशाभिषेक का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।