पूज्य क्षुल्लक 105 श्री धैर्यसागर जी

dhairyasagarji2पूज्य क्षुल्लक 105 श्री धैर्यसागर जी

मध्यप्रदेश की संस्कार धानी जबलपुर नगरी में श्रीयुक्त श्रेष्ठी श्री प्रेमचंद जी जैन एडवोकेट एवं श्रीमति अंगुरीदेवी की कोख से 1953 को होनहार बालक ने जन्म लिया जिसका नाम संजय रखा गया। तीन भाई और एक बहिन सभी प्रेमपूर्वक सुखमय बाल्यावस्था में थे । सन 1984 में चरित्र के एक धारक महान तपस्वी संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का ससंघ आगमन मढियाजी, जबलपुर में हुआ । आपको क्षुल्लक श्री धैर्यसागर जी नाम से ही उद्बोधित किया गया । आचार्य संघ में 6 वर्ष तक की अनवरत स्वध्याय आदि क्रियाओं में संलग्न रहें फिर आचार्य श्री की आज्ञा से आध्यात्मिक संत मुनि श्री सुधासागर जी के साधर्म प्रभावन हेतु विहार कर धर्म प्रभावना कर रहे है । आपकी दीक्षा सन 1987 में हुई है ।